शास्त्र पंचांग

जयपुर, शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

कार्तिक कृष्ण द्वादशी, विक्रम संवत 2083। जयपुर में सूर्योदय सुबह 6:40 और सूर्यास्त शाम 5:41 पर है। पंचांग का यह दिन अगले दिन के सूर्योदय पर समाप्त होगा।

आज का विशेष

पंचांग के पाँच अंग

तिथि · कृष्ण द्वादशी

सुबह 10:31 तक; उपरांत कृष्ण त्रयोदशी

तिथि चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से निर्धारित होती है। एकादशी, प्रदोष, अमावस्या और श्राद्ध जैसे व्रत और अनुष्ठान इसी आधार पर तय किए जाते हैं।

नक्षत्र · हस्त

तड़के 4:44 तक

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा की स्थिति बताता है। जन्म नक्षत्र का विचार नामकरण और विवाह के लिए गुण मिलान में किया जाता है।

योग · विष्कम्भ

तड़के 4:10 तक

सूर्य और चंद्रमा के अंशों (भोगांश) को जोड़कर योग निकाला जाता है। मुहूर्त चुनते समय पंचांग के अन्य अंगों के साथ इसका भी विचार किया जाता है।

करण · तैतिल

सुबह 10:31 तक

करण तिथि का आधा भाग होता है।

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक भद्रा नहीं है।

अशुभ काल

राहु काल

सुबह 10:48 – दोपहर 12:10

राहु काल में नया काम शुरू न करने की परंपरा है; पहले से चल रहा काम जारी रखा जा सकता है।

यमगंड

दोपहर 2:56 – शाम 4:18

यात्रा पर निकलने या नया काम शुरू करने के लिए यह समय टाला जाता है।

गुलिक काल

सुबह 8:02 – 9:25

अधिकतर घरों में नए काम का आरंभ इस समय नहीं किया जाता।

होरा

दिन-रात में कुल चौबीस होराएँ होती हैं: सूर्योदय से सूर्यास्त तक बारह और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक बारह। दिन और रात की लंबाई के साथ इनकी अवधि बदलती है। हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है; पहली होरा उस दिन के वार-स्वामी ग्रह की होती है।

सुबह 6:40 – 7:35शुक्र
सुबह 7:35 – 8:30बुध
सुबह 8:30 – 9:25चंद्र
सुबह 9:25 – 10:20शनि
सुबह 10:20 – 11:15गुरु
सुबह 11:15 – दोपहर 12:10मंगल
दोपहर 12:10 – 1:05सूर्य
दोपहर 1:05 – 2:01शुक्र
दोपहर 2:01 – 2:56बुध
दोपहर 2:56 – 3:51चंद्र
दोपहर 3:51 – शाम 4:46शनि
शाम 4:46 – 5:41गुरु
शाम 5:41 – 6:46मंगल
शाम 6:46 – 7:51सूर्य
शाम 7:51 – रात 8:56शुक्र
रात 8:56 – 10:01बुध
रात 10:01 – 11:06चंद्र
रात 11:06 – 12:11शनि
रात 12:11 – 1:16गुरु
रात 1:16 – तड़के 2:21मंगल
तड़के 2:21 – 3:26सूर्य
तड़के 3:26 – 4:30शुक्र
तड़के 4:30 – सुबह 5:35बुध
सुबह 5:35 – 6:40चंद्र

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल

पंचांग की गणना कैसे होती है · दिन सूर्योदय से क्यों शुरू होता है

गणना विधि
दृक् गणित, लाहिरी अयनांश। जयपुर के स्थानीय सूर्योदय के आधार पर गणना की गई है।