महाशिवरात्रि 2027
महाशिवरात्रि 2027 — शनिवार, 6 मार्च 2027। यह दिन निशीथ काल में तिथि के चलने से तय होता है।
तिथि और नियम
महाशिवरात्रि 2027 शनिवार, 6 मार्च 2027 को है।
तिथि पूरे दिन नहीं टिकती। वह दोपहर में आरंभ होकर अगली सुबह समाप्त हो सकती है, इसलिए लगातार दो दिन किसी न किसी घड़ी में वही तिथि चलती मिलती है। इसी कारण पर्व की तिथि बताना अकेले पर्याप्त नहीं — यह भी बताना पड़ता है कि तिथि दिन के किस काल में चलनी चाहिए।
महाशिवरात्रि के लिए वह काल निशीथ काल है। जिस दिन तिथि उस काल को सबसे अधिक ढकती है, वही दिन पर्व का है।
यह रात्रि का व्रत है, इसलिए तिथि की परीक्षा निशीथ काल में होती है — सूर्यास्त से सूर्योदय तक की रात को पंद्रह भागों में बाँटकर आठवाँ भाग। इसी कारण महाशिवरात्रि उस दिन पड़ सकती है जिसके सूर्योदय पर पिछली तिथि चल रही हो।
आपके नगर में निशीथ काल
यह काल आपके अपने क्षितिज के सूर्य से बनता है। दिल्ली का सूर्यास्त चेन्नई के सूर्यास्त से अलग है, इसलिए यह काल हर नगर में अलग पड़ता है — देश भर में लगभग चालीस मिनट का अंतर।
| नगर | निशीथ काल |
|---|---|
| बेंगलुरु | 12:06 am – 12:54 am |
| चेन्नई | 11:55 pm – 12:44 am |
| हैदराबाद | 12:02 am – 12:51 am |
| दिल्ली | 12:07 am – 12:56 am |
| मुंबई | 12:25 am – 1:13 am |
| वाराणसी | 11:44 pm – 12:33 am |
| लखनऊ | 11:52 pm – 12:41 am |
| जयपुर | 12:13 am – 1:02 am |
यह पूरा निशीथ काल है। पंचांग प्रायः इसके भीतर एक छोटा मुहूर्त भी छापते हैं, जो स्थिर लग्न के आधार पर चुना जाता है। यदि आपने कहीं छोटा समय देखा हो, वह इसी के भीतर आता है।
तिथि कैसे निकाली गई
चंद्रमा और सूर्य के अंतर के प्रत्येक बारह अंश पर एक तिथि बनती है। यह अंतर Swiss Ephemeris से, लाहिरी अयनांश पर निकाला गया है, और तिथि के आरंभ तथा अंत का क्षण नगर के अपने क्षितिज के लिए गणित है।
छपने से पहले हर पर्व की तिथि प्रचलित पंचांगों से मिलाई जाती है। जो तिथि मिल नहीं पाती, वह छापी नहीं जाती।
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तिथि Swiss Ephemeris से, लाहिरी अयनांश पर। दिन वही जिसका निशीथ काल तिथि सबसे अधिक ढकती है। छपने से पहले तिथि प्रचलित पंचांगों से मिलाई जाती है।